श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  2.1.118 
আনন্দে লাগিলা সবে করিতে কীর্তন
কেহ গায, কেহ নাচে, করযে ক্রন্দন
आनन्दे लागिला सबे करिते कीर्तन
केह गाय, केह नाचे, करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
सभी भक्त आनंदित होकर कीर्तन करने लगे। कुछ गा रहे थे, कुछ नाच रहे थे, और कुछ रो रहे थे।
 
All the devotees were filled with joy and began to chant. Some were singing, some were dancing, and some were crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)