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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 115
श्लोक
2.1.115
কেহ বলে,—“ঈশ্বর পুরীর সঙ্গ হৈতে
কিবা দেখিলেন কৃষ্ণ প্রকাশ গযাতে”
केह बले,—“ईश्वर पुरीर सङ्ग हैते
किबा देखिलेन कृष्ण प्रकाश गयाते”
अनुवाद
दूसरों ने कहा, "ईश्वर पुरी के साथ संगति करके, उन्होंने गया में कृष्ण का कुछ स्वरूप अवश्य देखा होगा।"
Others said, "Having associated with Ishvara Puri, he must have seen some form of Krishna at Gaya."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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