श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.1.113 
কেহ বলে,—“নিমাই পণ্ডিত ভাল হৈলে”
পাষণ্ডীর মুণ্ড ছিণ্ডিবারে পারি হেলে”
केह बले,—“निमाइ पण्डित भाल हैले”
पाषण्डीर मुण्ड छिण्डिबारे पारि हेले”
 
 
अनुवाद
दूसरों ने कहा, “यदि निमाई पंडित अच्छे भक्त बन जाएं, तो हम आसानी से नास्तिकों के सिर फाड़ सकते हैं।”
 
Others said, “If Nimai Pandit becomes a good devotee, we can easily tear off the heads of the atheists.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)