श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.1.109 
যে যে দেখিলেন প্রেম, সবেই অবাক্য
অপূর্ব দেখিযা কারো দেহে নাহি বাহ্য
ये ये देखिलेन प्रेम, सबेइ अवाक्य
अपूर्व देखिया कारो देहे नाहि बाह्य
 
 
अनुवाद
भगवान द्वारा प्रदर्शित परमानंद के रूपांतरण को देखकर वे सभी अवाक रह गए तथा बाह्य चेतना भी खो बैठे।
 
Seeing the transformation of ecstasy displayed by the Lord, they were all left speechless and even lost their external consciousness.
तात्पर्य
प्रभु के सबसे अद्भुत अप्रत्याशित महान प्रेम के रूपों को देखकर सारे भक्त मौन हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)