श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.1.102 
মেলিতে না পারে দুই চক্ষু প্রেম-জলে
সবে এক ’কৃষ্ণ কৃষ্ণ’ শ্রী-বদনে বলে
मेलिते ना पारे दुइ चक्षु प्रेम-जले
सबे एक ’कृष्ण कृष्ण’ श्री-वदने बले
 
 
अनुवाद
प्रेमाश्रु की अधिकता के कारण वे अपनी आँखें नहीं खोल पा रहे थे। कृष्ण के नाम के अलावा उनके सुन्दर मुख से कुछ भी नहीं निकल रहा था।
 
He was unable to open his eyes due to the abundance of tears of love. Nothing but the name of Krishna came out of his beautiful mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)