श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.1.100 
এত বলি’ ভূমিতে পডিলা বিশ্বম্ভর
ধূলায লোটায সর্ব-সেব্য কলেবর
एत बलि’ भूमिते पडिला विश्वम्भर
धूलाय लोटाय सर्व-सेव्य कलेवर
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर विश्वम्भर पुनः भूमि पर गिर पड़े और उनका सम्पूर्ण शरीर, जो सबके लिए पूजनीय है, धूल से ढक गया।
 
Having said this, Visvambhara fell down on the ground again and his entire body, which is revered by all, was covered with dust.
तात्पर्य
श्री गौर का विलक्षण शरीर चौदः भौतिक लोकों और आध्‍यात्मिक वैकुण्‍ठ और गोलोक-वृंदावन में सभी अधीनस्‍थ लोगों के द्वारा पूजा करने योग्‍य है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)