|
| |
| |
श्लोक 1.9.77  |
তপস্বী বোলযে,—“যদি যাইবা নিশ্চয
স্নান করি’ কিছু খাই’ করহ বিজয” |
तपस्वी बोलये,—“यदि याइबा निश्चय
स्नान करि’ किछु खाइ’ करह विजय” |
| |
| |
| अनुवाद |
| तब संन्यासी ने कहा, "यदि तुम्हें जाना ही है, तो पहले स्नान करके कुछ खा लो। फिर जा सकते हो।" |
| |
| Then the monk said, "If you have to go, then first take a bath and eat something. Then you can go." |
|
|
| ✨ ai-generated |
| |
|