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श्लोक 1.9.236  |
বৃন্দাবন-আদি করি’ ভ্রমে নিত্যানন্দ
যাবত্ না আপনা’ প্রকাশে’ গৌরচন্দ্র |
वृन्दावन-आदि करि’ भ्रमे नित्यानन्द
यावत् ना आपना’ प्रकाशे’ गौरचन्द्र |
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| अनुवाद |
| भगवान नित्यानंद वृन्दावन के वनों में तब तक भ्रमण करते रहे जब तक भगवान गौरचन्द्र ने अपना ऐश्वर्य प्रदर्शित नहीं कर दिया। |
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| Lord Nityananda wandered in the forests of Vrindavana until Lord Gaurachandra displayed His opulence. |
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