श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 9: नित्यानंद की बाल्य लीलाएँ और पवित्र स्थलों की यात्रा  »  श्लोक 203
 
 
श्लोक  1.9.203 
তাঙ্’র তীর্থ-যাত্রা সব কে পারে কহিতে?
কিছু লিখিলাঙ মাত্র তাঙ্’র কৃপা হৈতে
ताङ्’र तीर्थ-यात्रा सब के पारे कहिते?
किछु लिखिलाङ मात्र ताङ्’र कृपा हैते
 
 
अनुवाद
भगवान की तीर्थयात्रा का वर्णन कौन कर सकता है? मैंने उनकी कृपा से ही संक्षेप में लिखा है।
 
Who can describe the Lord's pilgrimage? By His grace I have written briefly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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