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श्लोक 1.9.187  |
এই-মত মাধবেন্দ্র নিত্যানন্দ-প্রতি
অহর্-নিশ বোলেন, করেন রতি-মতি |
एइ-मत माधवेन्द्र नित्यानन्द-प्रति
अहर्-निश बोलेन, करेन रति-मति |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार माधवेन्द्र पुरी दिन-रात अपनी वाणी और क्रियाकलापों से नित्यानंद के प्रति स्नेह प्रदर्शित करते रहते थे। |
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| Thus, Madhavendra Puri continued to show his affection for Nityananda day and night through his words and actions. |
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