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श्लोक 1.9.184  |
যে-সে স্থানে যদি নিত্যানন্দ-সঙ্গ হয
সেই স্থান সর্ব-তীর্থ-বৈকুণ্ঠাদি-ময |
ये-से स्थाने यदि नित्यानन्द-सङ्ग हय
सेइ स्थान सर्व-तीर्थ-वैकुण्ठादि-मय |
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| अनुवाद |
| “जहाँ भी नित्यानंद की संगति मिलती है, वह स्थान परम पवित्र और पूर्णतया दिव्य है। |
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| “Wherever one finds the company of Nityananda, that place is supremely sacred and absolutely divine. |
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