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श्लोक 1.9.158  |
মাধব-পুরীরে দেখিলেন নিত্যানন্দ
তত-ক্ষণে প্রেমে মূর্ছা হৈলা নিস্পন্দ |
माधव-पुरीरे देखिलेन नित्यानन्द
तत-क्षणे प्रेमे मूर्छा हैला निस्पन्द |
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| अनुवाद |
| जब नित्यानंद ने माधवेन्द्र पुरी को देखा, तो वे तुरन्त ही प्रेम में स्तब्ध हो गये और अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े। |
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| When Nityananda saw Madhavendra Puri, he immediately fell in love and fell unconscious on the ground. |
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