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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 94
श्लोक
1.8.94
সবে এই বর, কৃষ্ণ, মাগি তোর ঠাঞি
’গৃহস্থ হৈযা ঘরে রহুক নিমাঞি’”
सबे एइ वर, कृष्ण, मागि तोर ठाञि
’गृहस्थ हैया घरे रहुक निमाञि’”
अनुवाद
"हे कृष्ण, मैं आपसे केवल यही वर माँगता हूँ। निमाई गृहस्थ होकर घर पर ही रहें।"
"O Krishna, I ask only this boon from you. May Nimai become a householder and stay at home."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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