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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 64
श्लोक
1.8.64
পডুযা-সকল বোলে,—“আজি ঘরে যাহ
কালি যে জিজ্ঞাসি, তাহা বলিবারে চাহ”
पडुया-सकल बोले,—“आजि घरे याह
कालि ये जिज्ञासि, ताहा बलिबारे चाह”
अनुवाद
अन्य छात्रों ने कहा, “आज आप घर जा सकते हैं, और कल हमारे पास आपके लिए और प्रश्न होंगे।”
The other students said, “You can go home today, and tomorrow we will have more questions for you.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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