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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 57
श्लोक
1.8.57
“ধাতু-সূত্র বাখানহ”—বোলে সে পডুযা
প্রভু বোলে,—“বাখানি যে, শুন মন দিযা”
“धातु-सूत्र वाखानह”—बोले से पडुया
प्रभु बोले,—“वाखानि ये, शुन मन दिया”
अनुवाद
फिर उसी शिष्य ने कहा, “सूत्रों को मौखिक मूलों पर समझाइए।” भगवान ने उत्तर दिया, “मैं जो कहता हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनिए।”
Then the same disciple said, “Explain the sutras on the oral roots.” The Lord replied, “Listen carefully to what I say.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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