vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
»
श्लोक 52
श्लोक
1.8.52
প্রতি-ঘাটে যায প্রভু গঙ্গায সাঙ্তারি’
একো ঘাটে দুই চারি দণ্ড ক্রীডা করি’
प्रति-घाटे याय प्रभु गङ्गाय साङ्तारि’
एको घाटे दुइ चारि दण्ड क्रीडा करि’
अनुवाद
भगवान प्रत्येक घाट पर तैरकर गए और वहां एक या दो घंटे तक शास्त्रार्थ किया।
The Lord swam to each ghat and debated there for an hour or two.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×