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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 206
श्लोक
1.8.206
এই-মত ভক্ত-গণ সবার কুশল
চিন্তেন-গাযেন কৃষ্ণচন্দ্রের মঙ্গল
एइ-मत भक्त-गण सबार कुशल
चिन्तेन-गायेन कृष्णचन्द्रेर मङ्गल
अनुवाद
इस प्रकार भक्तगण सदैव जीवों के कल्याण की कामना करते हैं और उनके लिए भगवान कृष्ण से प्रार्थना करते हैं।
Thus devotees always wish for the welfare of living beings and pray to Lord Krishna for them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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