vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
»
श्लोक 18
श्लोक
1.8.18
যা’র যথা-শক্তি ভিক্ষা সবেই সন্তোষে
প্রভুর ঝুলিতে দিযা নারী-গণ হাসে
या’र यथा-शक्ति भिक्षा सबेइ सन्तोषे
प्रभुर झुलिते दिया नारी-गण हासे
अनुवाद
सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार संतोषपूर्वक दान दिया। सभी स्त्रियाँ मुस्कुराते हुए अपनी भिक्षा भगवान की झोली में डाल रही थीं।
Everyone gave according to their capacity, with satisfaction. All the women smiled as they placed their alms into the Lord's bag.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×