vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
»
श्लोक 178
श्लोक
1.8.178
“কোথা হৈতে সুবর্ণ আনযে বারেবার
পাছে কোন প্রমাদ জন্মায আসি’ আর
“कोथा हैते सुवर्ण आनये बारेबार
पाछे कोन प्रमाद जन्माय आसि’ आर
अनुवाद
"ये सोना इतनी बार कहाँ से लाता है? मुझे डर है कि आगे चलकर कोई समस्या न खड़ी हो जाए।"
"Where does he get this gold so often? I'm afraid it might cause problems later."
तात्पर्य
प्रमाद शब्द का अर्थ है "खतरा" या "हानिकारक।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×