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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 170
श्लोक
1.8.170
পডিবারে তুমি বোল এখনি যাইবা
ঘরেতে সম্বল নাহি,—কালি কি খাইবা?”
पडिबारे तुमि बोल एखनि याइबा
घरेते सम्बल नाहि,—कालि कि खाइबा?”
अनुवाद
"तुम कहते हो कि अब स्कूल जाओगे, पर मेरे घर में तो कुछ भी नहीं बचा। कल क्या खाओगे?"
"You say you're going to school now, but there's nothing left in my house. What will you eat tomorrow?"
तात्पर्य
संबाला शब्द संस्कृत की जड़ सम्ब से निकला है जिसका अर्थ होता है, 'आवश्यकता' या 'आजीविका'।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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