श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  1.8.168 
ধীরে ধীরে আই তবে বলিতে লাগিলা
“এত অপচয, বাপ, কি-কার্যে করিলা?
धीरे धीरे आइ तबे बलिते लागिला
“एत अपचय, बाप, कि-कार्ये करिला?
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् माता शची ने धीरे से उनसे पूछा, "मेरे प्रिय पुत्र, तुमने इतनी सारी चीजें क्यों नष्ट कर दी हैं?
 
Thereupon Mother Shachi gently asked him, “My dear son, why have you destroyed so many things?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)