श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  1.8.121 
তাহার কেমতে দুঃখ রহিবে শরীরে?
আনন্দ-স্বরূপ করিলেন জননীরে
ताहार केमते दुःख रहिबे शरीरे?
आनन्द-स्वरूप करिलेन जननीरे
 
 
अनुवाद
अतः वह दुःखी कैसे रह सकती थी? वरन् शचीदेवी शीघ्र ही अपने आनंदमय स्वरूप को पुनः प्राप्त कर गईं।
 
So how could she remain sad? Instead, Shachidevi quickly regained her blissful form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)