vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
»
श्लोक 120
श्लोक
1.8.120
যঙ্’রা স্মৃতি-মাত্র পূর্ণ হয সর্ব কাম
সে-প্রভু যাঙ্হার পুত্র-রূপে বিদ্যমান
यङ्’रा स्मृति-मात्र पूर्ण हय सर्व काम
से-प्रभु याङ्हार पुत्र-रूपे विद्यमान
अनुवाद
जिनके स्मरण मात्र से ही सबकी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं, वे ही उनके पुत्र रूप में साक्षात् उपस्थित थे।
The one whose mere remembrance fulfils everyone's wishes, was present in person in the form of his son.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×