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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 113
श्लोक
1.8.113
হেন-মতে জননীর সঙ্গে গৌরহরি
আছেন নিগূঢ-রূপে আপনা’ সম্বরি
हेन-मते जननीर सङ्गे गौरहरि
आछेन निगूढ-रूपे आपना’ सम्वरि
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरहरि और उनकी माता ने एकांत में रहते हुए अपने दुःख को नियंत्रित किया।
Thus Sri Gaurhari and his mother controlled their grief while living in solitude.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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