श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  1.7.97 
আমরাও না রহিব, চলি’ যাঙ বনে
এ পাপিষ্ঠ-লোক-মুখ না দেখি যেখানে
आमराओ ना रहिब, चलि’ याङ वने
ए पापिष्ठ-लोक-मुख ना देखि येखाने
 
 
अनुवाद
“आओ हम भी घर छोड़कर जंगल में चले जाएँ, फिर हमें इन पापियों का मुँह नहीं देखना पड़ेगा।
 
“Come, let us also leave our homes and go to the forest, then we will not have to see the faces of these sinners.
तात्पर्य
पापिष्ठ-लोक-मुख शब्द उन व्यक्तियों के मुख को संदर्भित करता है जो कृष्ण के विरोधी हैं और भौतिक जीवन में निपुण हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)