यदि कोई विश्वरूप के संन्यास ग्रहण करने के मनोरंजन को सुनता है, तो वह कर्मफलकारी गतिविधियों के बंधन से मुक्ति प्राप्त करेगा। श्री विश्वरूप के तीन विस्तार हैं - पहला पुरुष अवतार, कारणोदकशायी विष्णु, दूसरा पुरुष अवतार, गर्भोदकशायी विष्णु और तीसरा पुरुष अवतार, क्षीरोदकशायी विष्णु। यदि कोई जीवित व्यक्ति इन तीन विष्णु रूपों को सत्यता से समझता है, तो वह जीवन की भौतिक अवधारणा से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
