इस प्रकार परम संयमी जगन्नाथ मिश्र ने ज्ञान की प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे अपने मन को नियंत्रित किया।
Thus Jagannatha Mishra, the supreme ascetic, gradually controlled his mind through the process of knowledge.
तात्पर्य
विश्वरूप के संन्यास ग्रहण करने पर जगन्नाथ मिश्र का वात्सल्य-रस का वह रूप जो शारीरिक मान्यता से उत्पन्न हुआ था, टूट गया और उन्होंने निरंतर परम सत्य भगवान विष्णु को अपना पुत्र समझा | यह एहसास सांसारिक माता-पिता से मुक्ति दिलाता है और सच्चा संन्यास कहलाता है |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥