श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  1.7.84 
আনন্দ বিশেষ আরো করিতে যুযায”
এত বলি’ সকলে ধরযে হাতে-পা’য
आनन्द विशेष आरो करिते युयाय”
एत बलि’ सकले धरये हाते-पा’य
 
 
अनुवाद
“इसलिए यह उचित है कि आप पहले से भी अधिक प्रसन्न हों।” यह कहकर उन सबने जगन्नाथ मिश्र के हाथ-पैर पकड़ लिए।
 
"Therefore, it is only right that you should be happier than ever." Saying this, they all held Jagannath Mishra's hands and feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)