श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  1.7.81 
“স্থির হও, মিশ্র, দুঃখ না ভাবিহ মনে
সর্ব-গোষ্ঠী উদ্ধারিলা সেই মহাজনে
“स्थिर हओ, मिश्र, दुःख ना भाविह मने
सर्व-गोष्ठी उद्धारिला सेइ महाजने
 
 
अनुवाद
प्रिय मिश्र, कृपया अपने आप पर नियंत्रण रखें। दुःखी न हों, क्योंकि उस महान व्यक्तित्व ने हम सबका उद्धार किया है।
 
Dear Mishra, please control yourself. Don't be sad, because that great man has saved us all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)