श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.7.8 
পিতা, মাতা, কাহারে না করে প্রভু ভয
বিশ্বরূপ অগ্রজ দেখিলে নম্র হয
पिता, माता, काहारे ना करे प्रभु भय
विश्वरूप अग्रज देखिले नम्र हय
 
 
अनुवाद
भगवान किसी से नहीं डरते थे, यहाँ तक कि अपने माता-पिता से भी नहीं, परन्तु अपने बड़े भाई विश्वरूप को देखकर उन्होंने विनम्रता प्रदर्शित की।
 
The Lord was not afraid of anyone, not even his parents, but upon seeing his elder brother Visvarupa, he displayed humility.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)