श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.7.78 
উত্তম, মধ্যম, যে শুনিল নদীযায
হেন নাহি,—যে শুনিযা দুঃখ নাহি পয
उत्तम, मध्यम, ये शुनिल नदीयाय
हेन नाहि,—ये शुनिया दुःख नाहि पय
 
 
अनुवाद
नादिया में जिस किसी ने भी इस घटना के बारे में सुना - चाहे वह सामान्य भक्त हो या महान भक्त - सभी दुखी हुए।
 
Everyone in Nadia who heard about this incident – ​​whether ordinary devotees or great devotees – was saddened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)