श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.7.75 
গোষ্ঠী-সহ ক্রন্দন করযে উভরায
ভাইর বিরহে মূর্চ্ছা গেলা গৌর-রায
गोष्ठी-सह क्रन्दन करये उभराय
भाइर विरहे मूर्च्छा गेला गौर-राय
 
 
अनुवाद
श्री गौरांग अपने परिवार के सदस्यों के साथ जोर-जोर से रोने लगे और अंततः अपने भाई के वियोग में बेहोश हो गए।
 
Shri Gauranga, along with his family members, started crying loudly and eventually fainted in the separation from his brother.
तात्पर्य
उभराया शब्द का अर्थ है "ऊँचा।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)