श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.7.62 
ভক্তের সে চিত্ত প্রভু হরে সর্বথায
বিহরযে নবদ্বীপে বৈকুণ্ঠের রায
भक्तेर से चित्त प्रभु हरे सर्वथाय
विहरये नवद्वीपे वैकुण्ठेर राय
 
 
अनुवाद
वैकुण्ठ के भगवान ने नवद्वीप में अपनी लीलाओं का आनंद लेते हुए सभी भक्तों के हृदयों को आकर्षित किया।
 
The Lord of Vaikuntha, enjoying His pastimes in Navadvipa, attracted the hearts of all devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)