श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.7.52 
নিজ-পুত্র হৈতে পর-তনয কৃষ্ণেরে
কহ দেখি,—স্নেহ কৈল কেমন-প্রকারে?”
निज-पुत्र हैते पर-तनय कृष्णेरे
कह देखि,—स्नेह कैल केमन-प्रकारे?”
 
 
अनुवाद
कृपया मुझे समझाइए कि गोपियाँ अपने पुत्रों की अपेक्षा दूसरे के पुत्र कृष्ण के प्रति अधिक स्नेह कैसे प्रदर्शित करती थीं।
 
Please explain to me how the Gopis showed more affection towards someone else's son, Krishna, than towards their own sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)