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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
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श्लोक 51
श्लोक
1.7.51
“পরম অদ্ভুত কথা কহিলা, গোসাঞি!
ত্রিভুবনে এমত কোথাও শুনি নাই
“परम अद्भुत कथा कहिला, गोसाञि!
त्रिभुवने एमत कोथाओ शुनि नाइ
अनुवाद
“हे गोस्वामी, मैंने तीनों लोकों में ऐसी अद्भुत कथाएँ पहले कभी नहीं सुनीं।
“O Goswami, I have never heard such wonderful stories before in the three worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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