জন্ম হৈতে প্রভুরে সকল গোপী-গণে
নিজ-পুত্র হৈতেও স্নেহ করে মনে
जन्म हैते प्रभुरे सकल गोपी-गणे
निज-पुत्र हैतेओ स्नेह करे मने
अनुवाद
भगवान के जन्म के समय से ही गोपियों का भगवान के प्रति अपने पुत्रों से भी अधिक स्नेह था।
From the time of Lord's birth, the Gopis had more affection for Lord than for their own sons.
तात्पर्य
स्नेह या स्नेह हमेशा अधीनस्तों के लिए होता है। यद्यपि कृष्ण के सेवक जो लगातार उन्हें गोपनीय दोस्ती, मातृत्व और वैवाहिक प्रेम के भाव से निरंतर सेवा करते हैं, पूरी तरह से उनकी अधीनता में रहते हैं, लेकिन वे गर्व से खुद को कृष्ण से श्रेष्ठ मानते हैं ताकि वे अपने स्नेह को मज़बूत बना सकें। यह शुद्ध स्नेह कृष्ण के भक्तों में स्वयं कृष्ण की तुलना में अधिक पाया जाता है। उपासना करने योग्य भगवान की सर्वोच्चता उनके नौकरों से बड़ी होती है। जब श्री कृष्ण श्रीमती राधिकाजी द्वारा दी गई प्रेममयी सेवा का अपना ऋण चुकाने में असमर्थ हुए, तो उन्होंने श्री राधिकाजी का भाव स्वीकार किया और उनकी मानसिकता को उजागर किया। गौर-नागरियों जैसे छद्म संप्रदाय, जो भौतिक आनंद में लिप्त हैं, श्री गौरसुंदर द्वारा शुद्ध भक्ति सेवा और उनके सेवक के शुद्ध प्रेम के गौरव दोनों का प्रचार करने का विरोध करने वाले मूड को पोषित करते हैं। गौर-कृष्ण के शुद्ध भक्त इसे स्वीकार नहीं करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥