श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.7.47 
এই গৌরচন্দ্র যবে জন্মিলা গোকুলে
শিশু সঙ্গে গৃহে গৃহে ক্রীডা করি’ বুলে
एइ गौरचन्द्र यबे जन्मिला गोकुले
शिशु सङ्गे गृहे गृहे क्रीडा करि’ बुले
 
 
अनुवाद
जब श्री गौरचन्द्र गोकुल में कृष्ण के रूप में प्रकट हुए, तो वे अन्य बालकों के साथ वहाँ के सभी घरों में खेले।
 
When Sri Gaurchandra appeared in Gokul as Krishna, he played with other children in all the houses there.
तात्पर्य
श्री गौराचंद्र स्वंय, श्री कृष्णचंद्र के रूप में गोकुल में प्रकट हुए। नास्तिक समुदाय कहता है कि श्री कृष्ण, श्री गौर से 4,712 वर्ष पूर्व प्रकट हुए थे और क्योंकि कृष्ण गौर से पहले और गौर कृष्ण के बाद आए इसलिए निश्चित रूप से इनमे भेद है। श्रील वृंदावन दास ठाकुर, यहाँ निषेध करते हैं कि शुद्ध भक्त, परम सत्य के संबंध में भौतिक समय, स्थान और परिस्थितियों पर विचार करें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)