श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.7.38 
প্রতি-অঙ্গে নিরুপম লাবণ্যের সীমা
কোটী চন্দ্র নহে এক নখের উপমা
प्रति-अङ्गे निरुपम लावण्येर सीमा
कोटी चन्द्र नहे एक नखेर उपमा
 
 
अनुवाद
भगवान के प्रत्येक अंग की सुन्दरता सर्वोच्च सीमा को लांघती थी। करोड़ों चन्द्रमा भी उनके एक पैर के नख के बराबर नहीं थे।
 
The beauty of every part of the Lord transcended all limits. Even millions of moons were no match for a single toenail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)