श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.7.30 
সর্ব-শাস্ত্রে বাখানেন কৃষ্ণ-ভক্তি-সার
শুনিযা অদ্বৈত সুখে করেন হুঙ্কার
सर्व-शास्त्रे वाखानेन कृष्ण-भक्ति-सार
शुनिया अद्वैत सुखे करेन हुङ्कार
 
 
अनुवाद
विश्वरूप ने कृष्ण भक्ति को सभी शास्त्रों का सार बताया। उनका स्पष्टीकरण सुनकर अद्वैत प्रभु प्रसन्नता से गर्जना करने लगे।
 
Vishwaroop described devotion to Krishna as the essence of all the scriptures. Hearing his explanation, Advaita Prabhu started roaring with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)