হেন মতে নবদ্বীপে শ্রী-গৌরসুন্দর
বাল্য-লীলা-ছলে করে প্রকাশ বিস্তর
हेन मते नवद्वीपे श्री-गौरसुन्दर
बाल्य-लीला-छले करे प्रकाश विस्तर
अनुवाद
इस प्रकार श्री गौरसुंदर ने नवद्वीप में अपनी बचपन की लीलाएँ प्रकट कीं।
Thus Sri Gaurasundara revealed His childhood pastimes in Navadvipa.
तात्पर्य
करे प्रकाश विस्तारा शब्द यह संकेत करते हैं कि श्री गौरासुंदर के बचपन में किए गए चंचल लीलाओं के दो उद्देश्य थे। प्रत्यक्ष उद्देश्य था अपने भक्तों को आकर्षित करना और निरंतर उनके परमानंद को बढ़ाना, और अप्रत्यक्ष उद्देश्य सांसारिक वस्तुओं के अस्थायी स्वभाव की पुष्टि करके उन्हें चंचल तरीके से नष्ट करना था। चूंकि सांसारिक वस्तुओं को स्वीकार करना और अस्वीकार करना विभिन्न परेशानियां पैदा करता है, इसलिए ऐसी वस्तुओं का आनंद लेने के प्रयास को बाधित या कम करना निश्चित रूप से वातानुकूलित आत्माओं के शाश्वत लाभ के लिए है। एक वातानुकूलित आत्मा के संवैधानिक कर्तव्य उसकी बाहरी धारणा के कारण मानसिक अटकल में बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप, प्रभु की सेवा करने के बजाय, भौतिक दुनिया का आनंद लेने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इस प्रवृत्ति की अनुपस्थिति में, भौतिक आनंद से मुक्ति और कृष्ण को प्राप्त करने के प्रयास के रूप में भक्ति सेवा की आध्यात्मिक संवैधानिक व्यस्तता प्रकट होती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥