श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.7.29 
ঊষঃ-কালে বিশ্বরূপ করি’ গঙ্গা-স্নান
অদ্বৈত-সভায আসি’ হয উপস্থান
ऊषः-काले विश्वरूप करि’ गङ्गा-स्नान
अद्वैत-सभाय आसि’ हय उपस्थान
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन प्रातःकाल श्री विश्वरूप गंगा में स्नान करते और फिर अद्वैत प्रभु के घर पर होने वाली सभा में जाते।
 
Every morning Sri Vishwaroopa would bathe in the Ganga and then go to the meeting held at Advaita Prabhu's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)