श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.7.26 
কুতর্ক ঘুসিযা সব অধ্যাপক মরে
’ভক্তি’ হেন নাম নাহি জানযে সṁসারে
कुतर्क घुसिया सब अध्यापक मरे
’भक्ति’ हेन नाम नाहि जानये सꣳसारे
 
 
अनुवाद
गुरुजनों ने व्यर्थ के तर्क-वितर्क में अपना जीवन नष्ट कर दिया। संसार के लोगों ने तो भक्ति का नाम भी नहीं सुना था।
 
The teachers wasted their lives in futile arguments. The people of the world had never even heard of devotion.
तात्पर्य
घुसिया शब्द का अर्थ "घोषित करना", "व्याख्या करना" या "प्रकट करना" होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)