श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.7.23 
কোথাও না শুনে কেহ কৃষ্ণের কীর্তন
দগ্ধ দেখে সকল সṁসার অনুক্ষণ
कोथाओ ना शुने केह कृष्णेर कीर्तन
दग्ध देखे सकल सꣳसार अनुक्षण
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण के नाम के कीर्तन की ध्वनि कहीं भी सुनाई नहीं दे रही थी, क्योंकि संसार में सभी लोग निरंतर भौतिक अस्तित्व की अग्नि में जल रहे थे।
 
The sound of chanting the name of Lord Krishna was not heard anywhere, because all the people in the world were constantly burning in the fire of material existence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)