श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  1.7.198 
অলৌকিক দেখিযা শিশুর সর্ব-কর্ম
বিস্ময ভাবেন, কেহ নাহি জানে মর্ম
अलौकिक देखिया शिशुर सर्व-कर्म
विस्मय भावेन, केह नाहि जाने मर्म
 
 
अनुवाद
बालक की असाधारण गतिविधियों को देखकर सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए, फिर भी कोई भी उसे समझ नहीं सका।
 
Everyone was surprised to see the extraordinary activities of the child, yet no one could understand him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)