भाग्य से बालक चाहे आपने पडिते
भाल दिने यज्ञ-सूत्र देह’ भाल मते”
अनुवाद
"आप भाग्यशाली हैं कि आपका बेटा पढ़ना चाहता है। आपको किसी शुभ दिन उसे ब्राह्मण धागा देने का प्रबंध करना चाहिए।"
"You are fortunate that your son wants to study. You should arrange to give him the Brahmin thread on an auspicious day."
तात्पर्य
यज्ञ-सूत्र शब्द उस तीन सूत्रों को दर्शाता है जो व्यक्ति को यज्ञोपवीत संस्कार में प्राप्त होते हैं। शास्त्रों का अध्ययन आरंभ करने के लिए यज्ञोपवीत ग्रहण करना होता है। एक बार जन्म लेने वाले शूद्र शास्त्र अध्ययन करने के योग्य नहीं होते। केवल द्विज ब्राह्मण ही यज्ञोपवीत ग्रहण करने, दूसरों को उपासना सिखाने, दान करने और शास्त्रों का अध्ययन करने के योग्य होते हैं। इन कार्यों के अतिरिक्त ब्राह्मण उपासना करने, सिखाने और दान ग्रहण करने के भी योग्य होते हैं। यज्ञोपवीत ग्रहण किए बिना ब्राह्मण यज्ञ करने के योग्य नहीं होता। कहा गया है: उप-वेद-समीपे त्वाँ नेष्ये- "मैं तुम्हें वेदों के समीप ले जाऊँगा," या "मैं तुम्हें वेद सिखाऊँगा।" आचार्य इसी उद्देश्य से व्यक्ति को यज्ञोपवीत प्रदान करता है - उसे वेद अध्ययन की योग्यता प्रदान करने के लिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥