श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 195
 
 
श्लोक  1.7.195 
যে করিবে কৃষ্ণচন্দ্র, সেই সত্য হযে
চিন্তা পরিহরি’ দেহ’ পডিতে নির্ভযে
ये करिबे कृष्णचन्द्र, सेइ सत्य हये
चिन्ता परिहरि’ देह’ पडिते निर्भये
 
 
अनुवाद
"कृष्ण जो भी चाहते हैं, वह अवश्य होगा। इसलिए अपनी चिंता त्याग दो और निर्भय होकर उन्हें अध्ययन करने दो।"
 
"Whatever Krishna wishes will surely happen. So give up your worries and let him study fearlessly."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)