श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  1.7.193 
মিশ্র-স্থানে শচী সব কহিলেন কথা
’পডিতে না পায পুত্র মনে ভাবে’ ব্যথা’
मिश्र-स्थाने शची सब कहिलेन कथा
’पडिते ना पाय पुत्र मने भावे’ व्यथा’
 
 
अनुवाद
शची ने उसे पूरी बात बताई। फिर बोली, "हमारा बेटा उदास है क्योंकि उसे पढ़ने नहीं दिया जा रहा है।"
 
Shachi told her the whole story. Then she said, "Our son is sad because he is not being allowed to study."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)