श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  1.7.191 
’তত্ত্ব’ কহিলেন প্রভু দত্তাত্রেয-ভাবে
না বুঝিল কেহ বিষ্ণু-মাযার প্রভাবে
’तत्त्व’ कहिलेन प्रभु दत्तात्रेय-भावे
ना बुझिल केह विष्णु-मायार प्रभावे
 
 
अनुवाद
भगवान ने दत्तात्रेय की मुद्रा में परम सत्य कहा, फिर भी उनकी माया के प्रभाव के कारण कोई भी उन्हें पहचान नहीं सका।
 
The Lord spoke the ultimate truth in the posture of Dattatreya, yet no one could recognize Him due to the influence of His Maya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)