श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.7.19 
তা’রে বলি ’সুকৃতি’,—যে দোলা, ঘোডা চডে
দশ-বিশ জন যা’র আগে পাছে রডে
ता’रे बलि ’सुकृति’,—ये दोला, घोडा चडे
दश-बिश जन या’र आगे पाछे रडे
 
 
अनुवाद
“हम उस व्यक्ति को धर्मपरायण मानते हैं, जो दस या बीस लोगों से घिरा हुआ पालकी या घोड़े पर सवार हो।
 
“We consider a person to be pious who rides in a palanquin or on a horse, surrounded by ten or twenty people.
तात्पर्य
दूसरी ओर, उनका मानना ​​था कि भाग्यशाली व्यक्ति वही है जो घोड़े या पालकी पर सवार होकर अपने ऐश्वर्य पर गर्व करता है और उसके साथ कई सेवक और सहयोगी होते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)