श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  1.7.189 
না আইসে প্রভু, সেইখানে বসি’ হাসে
সুকৃতি-সকল সুখ-সিন্ধু-মাঝে ভাসে
ना आइसे प्रभु, सेइखाने वसि’ हासे
सुकृति-सकल सुख-सिन्धु-माझे भासे
 
 
अनुवाद
फिर भी भगवान् ने अपना आसन नहीं छोड़ा। वे मुस्कुराते हुए वहीं बैठे रहे, जबकि वहाँ उपस्थित धर्मपरायण लोग आनंद के सागर में तैर रहे थे।
 
Yet the Lord did not leave His seat. He remained seated, smiling, while the pious people present there floated in an ocean of bliss.
तात्पर्य
सुकृति-सकल शब्द उन भाग्यवान व्यक्तियों को संदर्भित करता है जो भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)